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Showing posts with the label SUCCESS STORY

मिलिए सुपर लेडी से 100 बार रिजेक्ट हुईं लेकिन नहीं मानी हार, खड़ी कर दी 2 लाख करोड़ की कंपनी

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कैनवा की को-फाउंडर मेलेनिया पर्किंस की कहानी बताती है कि सपने देखना और हार न मानना ही सफलता की असली कुंजी है. 100 से ज्यादा बार वेंचर कैपिटलिस्ट से रिजेक्ट होने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और दुनिया को दिखा दिया कि मेहनत से कैसे एक आइडिया को हकीकत बनाया जा सकता है. मेलेनिया पर्किंस ऑस्ट्रेलिया के एक यूनिवर्सिटी में पार्ट टाइम टीचिंग कर रहीं थीं. इसी दौरान उन्होंने महसूस किया कि बच्चों को डेस्कटॉप डिजाइन सॉफ्टवेयर सिखाना न केवल जटिल है, बल्कि काफी महंगा भी है. यहीं से उन्हें एक सरल और किफायती डिजाइनिंग प्लेटफॉर्म कैनवा  बनाने का विचार आया. मेलानी ने अपने बॉयफ्रेंड (अब पति) क्लिफ ओब्रेच्ट के साथ मिलकर Fusion Books नाम का ईयरबुक पब्लिशिंग बिजनेस शुरू किया. यह उनकी पहली कोशिश थी. उन्होंने सिडनी के एक हेयर सैलून में इसका ऑफिस खोला. लेकिन उनकी असली उड़ान तब शुरू हुई जब उन्होंने Canva की नींव रखी. हालांकि, मेलानी को Canva को शुरू करने के लिए फंड जुटाना आसान नहीं था. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मेलानी ने 100 से ज्यादा वेंचर कैपिटलिस्ट से संपर्क किया, लेकिन सभी ने उनका ऑफर ठुकरा दिया....

टेक बर्नर श्लोक श्रीवास्तव ने अपनी स्मार्टवॉच बनाई और 24 घंटे में 3 करोड़ की बिक्री की!

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यूट्यूबर टेक बर्नर के अनार्क ने स्मार्टवॉच बाजार में शानदार डेब्यू किया है, जिसने लॉन्च के पहले 24 घंटों में 3 करोड़ रुपये की बिक्री हासिल की है। अनार्क, लेयर्स की नवीनतम पेशकश, जिसकी स्थापना 2022 में नील गोगिया और श्लोक श्रीवास्तव ने की थी, ने अपनी विशेष विशेषताओं और स्लीक डिजाइन के साथ उपभोक्ताओं को आश्चर्यचकित किया है। अनार्क की विशेषताएं 1. पेटेंटेड ऑक्टागोनल डिजाइन 2. मेडिकल-ग्रेड स्टेनलेस स्टील बॉडी 3. आईएमएल बैक केस 4. 60Hz AMOLED डिस्प्ले 5. हिसिलिकॉन एडवांस्ड चिपसेट 6. 7 दिनों तक की बैटरी लाइफ 7. वायरलेस चार्जिंग 8. ऑन-डिवाइस म्यूजिक स्टोरेज 9. टीडब्ल्यूएस कम्पेटिबिलिटी 10. कॉल्स के लिए नॉइज़ कैंसिलेशन श्लोक श्रीवास्तव की यात्रा एक कठिन रास्ते से शुरू हुई थी। एक मध्यम वर्ग के परिवार से आने वाले श्लोक की बचपन की महत्वाकांक्षा एक इंजीनियर बनने की थी। जब वह आईआईटी में नहीं आया, तो वह दुखी था। जल्द ही, उन्हें एहसास हुआ कि उन्हें प्रौद्योगिकी पसंद है, न कि एक प्रीमियम विश्वविद्यालय के लेबल। यूट्यूब पर एक टेक इंफ्लुएंसर के रूप में शुरुआत करने वाले श्लोक अब लेयर्स, ओवरले और ब्राइटसो ...

अनुष्का जयसवाल बिना किसी रासायनिक उर्वरक का उपयोग किए जैविक खेती से बनाया करोड़ो का कारोबार

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  उत्तर प्रदेश के लखनऊ की 23 वर्षीय महिला अनुष्का जयसवाल 2020 के लॉकडाउन के दौरान दिल्ली से घर लौट आईं। शौक के तौर पर उन्होंने अपनी छत पर टमाटर, मिर्च और बैंगन उगाना शुरू कर दिया और कुछ ही दिनों में पौधों पर फल लगने लगे। इससे उन्हें खेती में करियर बनाने का विचार आया। अनुष्का ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज से इकोनॉमिक्स में डिग्री ली है। हालाँकि शुरुआत में उन्होंने खेती में करियर बनाने के बारे में कभी नहीं सोचा था, लेकिन वह कॉर्पोरेट ऑफिस में काम नहीं करना चाहती थीं। उनके पिता, ओमप्रकाश जयसवाल, परिवहन व्यवसाय में थे, और उनके भाई, अक्षय, एक पायलट थे, उन्हें नौकरी करने का दबाव महसूस नहीं हुआ। उनके परिवार ने उनके फैसले का समर्थन किया। 2021 में, उन्होंने रिश्तेदारों से मोहनलालगंज में एक एकड़ जमीन पट्टे पर ली और खेती शुरू की। सरकार से 50% सब्सिडी के साथ, उन्होंने एक पॉलीहाउस बनाया और खीरे और लाल-पीली शिमला मिर्च की खेती शुरू की, जिससे क्रमशः 50 और 35 टन उपज हुई। एक एकड़ से शुरू हुई खेती अब 6 एकड़ तक फैल गई है। उन्होंने लाल पत्तागोभी और चाइनीज पत्तागोभी उगाना भी शुरू कर दिया है। उनक...

Success Story: अपने पिता के कारखाने में काम शुरू किया फिर ऐसे बने हुनरमंद... खड़ा कर दिया अरबों का साम्राज्‍य

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  राकेश चोपदार की कहानी प्रेरणा देने वाली है। पढ़ाई में कमजोर समझे जाने वाले राकेश आज बड़े उद्योगपति हैं। उन्होंने ग्लोबल मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में अपनी पहचान बनाई है। उनकी कहानी बताती है कि मुश्किलें भी सफलता की सीढ़ी बन सकती हैं। राकेश के शुरुआती दिन आसान नहीं थे। दसवीं कक्षा में कम नंबर आने पर उन्हें परिवार और दोस्तों की आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। कई लोगों ने उन्हें नाकामयाब करार दिया। लेकिन, राकेश ने हार नहीं मानी। वह अपने पिता के कारखाने 'एटलस फास्टनर्स' में काम करने लगे। वहां उन्होंने इंजीनियरिंग और मैन्यूफैक्चरिंग के गुर सीखे। यही अनुभव उनके भविष्य की नींव बना। आइए, यहां राकेश चोपदार की सफलता के सफर के बारे में जानते हैं। राकेश चोपदार पढ़ाई में अच्छे नहीं थे। उन्‍हें फिसड्डी होने के बहुत ताने मिलते थे। स्कूल छोड़ने के बाद उन्हें लगा उनका जीवन दिशाहीन है। परिवार वालों के सवाल भी उन्हें परेशान करने लगे। फिर राकेश ने पिता की नट-बोल्ट बनाने की फैक्ट्री में काम शुरू किया। बारह साल पारिवारिक व्यवसाय में काम करने के बाद राकेश ने 2008 में अपनी कंपनी आजाद इंजीनियरिंग शुरू की। ...

सीए ड्रॉपआउट ने पति के साथ खड़ा किया करोड़ों का साम्राज्‍य, ये है बिजनेस

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  दीप्ति अवस्‍थी शर्मा की कहानी संघर्ष से सफलता तक का सफर है। उनकी जिंदगी में कई मुश्किलें आईं। वह सीए परीक्षा पास नहीं कर पाईं। नौकरी के लिए दर-दर भटकीं, लेकिन कोई काम नहीं मिला। पहला बिजनेस पूरी तरह से डूब गया। इससे वह कर्ज में डूब गईं। इन सबके साथ उन्हें अच्छी गृहिणी बनने का सामाजिक दबाव भी झेलना पड़ा। मुश्किल दौर में उनके दोस्त भी उनसे दूर हो गए। लोग उन्हें 'सपनों में खोई हुई' कहने लगे। उन्हें अकेलापन घेरने लगा। लेकिन, दीप्ति ने जबरदस्‍त वापसी की। हर ठोकर उनके लिए एक नई सीढ़ी बनी। अपनी लगन और दृढ़ इच्छाशक्ति से उन्होंने अपनी जिंदगी और अपने सपनों को फिर से बनाया। आज वह 50 करोड़ के टर्नओवर वाले ब्रांड की मालकिन हैं। इसकी नींव उन्‍होंने पति के साथ रखी थी। आइए, यहां उनकी सफलता के सफर के बारे में जानते हैं। मिली असफलता, पर नहीं मानी हार दीप्ति नौकरी, CA परीक्षा और प्रतिष्ठित कॉलेज में प्रवेश पाने में असफल रहीं। उनका स्टार्टअप बंद हो गया। वह कर्ज में डूब गईं। गृहिणी होने की अपेक्षाओं के बीच उन्‍होंने अपने सपनों को संतुलित करने के लिए संघर्ष किया। दोस्तों को खोया और अकेली पड़ गईं।...

आज 400 करोड़ की है शार्क टैंक से एक करोड़ रुपये पाने वाली कंपनी ,केवल 2 जजों ने किया था पास

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     शार्क टैंक इंडिया का चौथा सीजन शुरू होने वाला है. पिछले तीन सीजन बहुत ही शानदार रहे हैं. यहां से कई कंपनियों को पैसा मिला है, जिसकी मदद से वे एक सफल बिजनेस बनकर उभरी हैं. लेकिन बहुत सी कंपनियां या आइडिया ऐसे भी हैं, जिन्हें पैसा तो नहीं मिला, मगर मार्गदर्शन जरूर हासिल हुआ. कुछ समय पहले एक कंपनी ने अपनी पिच शार्क टैंक की जजों के सामने पेश की थी. कंपनी को 1 करोड़ रुपया और मार्गदर्शन दोनों हासिल हुए. आज उसी कंपनी की वैल्यूएशन 400 करोड़ रुपये हो चुकी हैं. जी हां, एक करोड़ से 400 करोड़. शार्क टैंक शो भी इस कंपनी की सफलता को भुनाने की कोशिश में है. पॉपुलर शो के चौथे सीजन से पहले कुछ प्रोमो आए हैं. इन्हीं प्रोमो वीडियो में से एक में उस कंपनी और कंपनी के फाउंडर्स को दिखाया गया है. वे बता रहे हैं कि कैसे कंपनी को शार्क टैंक से सहारा मिला था. जिस कंपनी की हम बात कर रहे हैं, उसका नाम है प्रॉक्सी (Proxgy). यह कंपनी शार्क टैंक के पहले ही सीजन में आई थी. 2021 में जब शार्क टैंक शो टीवी पर आया तो इस कंपनी ने यहां अपना आइडिया रखा. जजों को यह पसंद आया और 1 करोड़ रुपये के निवेश की डील ...

ठुकराया 4 करोड़ का ऑफर, अब 5000 करोड़ की कंपनी के मालिक

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  कई बार असफलता अपने आइडिये पर काम करने वालों की बार-बार और बेहद कठिन परीक्षा लेती है. लेकिन ऐसे उदाहरणों की कमी नहीं है कि इन परीक्षाओं में खरे उतरने वाले आगे इतनी सफलता हासिल करते हैं कि ये दूसरों के लिए एक मिसाल बन जाते हैं. ऐसे ही एक शख्स हैं Gecko Robotics के Jake Loosararian. 3 साल की असफलता के बाद इस शख्स के सामने एक ऐसी परीक्षा आई जिसमें लगभग हर इंसान खुशी खुशी अपने सपने को छोड़ देता. हालांकि Jake अपने सपने पर कायम रहे और आज उनकी कंपनी अरबों के मूल्य वाली कंपनी बन चुकी है. ये सक्सेस स्टोरी साल 2015 में Jake को अपनी कंपनी पिट्सबर्ग स्थित Gecko Robotics को स्थापित करने के लिए संघर्ष करते हुए 3 साल हो चुके थे. कंपनी दीवारों पर चढ़ने में सक्षम ऐसे रोबोट तैयार करती है जो पावर प्लांट से लेकर न्यूक्लियर मिसाइल के इंफ्रास्ट्रक्चर की तेजी से जांच कर सकते थे. हालांकि पहले 3 साल में इस तकनीक को ज्यादा ग्राहक नहीं मिल रहे थे. स्थिति ये थी कि जैक के खाते में 150 डॉलर से भी कम बचे थे और वो अपने दोस्त के घर में फर्श पर सोते थे. इसी स्थिति में उन्होने अपने जीवन की सबसे बड़ी दुविधा का सामान...

Success Story: बैंक की नौकरी छोड़ शुरू किया यह काम, अब 64 वर्ग फीट के कमरे से 5 लाख महीने की कमाई

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  कोच्चि के अजय गोपीनाथ ने बैंक की नौकरी छोड़कर माइक्रोग्रीन्स की खेती शुरू की। अब व‍ह 5 लाख रुपये महीना कमा रहे हैं। साल 2020 में सिटीग्रुप छोड़ने के बाद अजय अपने 64 वर्ग फीट के कमरे में ऑर्गेनिक माइक्रोग्रीन्स उगाते हैं। वह जिम, अस्पताल, होटल और र‍िटेल खरीदारों को इनकी बिक्री करते हैं। यही नहीं, अजय पूरे भारत में किसानों को इनडोर फार्मिंग यूनिट स्थापित करने का प्रशिक्षण देकर भी कमाते हैं। आइए, यहां अजय गोपीनाथ की सफलता के सफर के बारे में जानते हैं। अजय गोपीनाथ की कहानी 2017 में बेंगलुरु के एक रेस्टोरेंट में शुरू होती है। दोस्तों के साथ लंच के दौरान सिटीग्रुप के बैंकर अजय सलाद में सजे माइक्रोग्रीन्स देखकर हैरान रह गए। उत्सुकतावश उन्होंने माइक्रोग्रीन्स के बारे में रिसर्च शुरू कर दी। माइक्रोग्रीन्स सब्जियां, अनाज और जड़ी-बूटियां होती हैं। इन्‍हें बीज के अंकुरण के शुरुआती चरण में ही काट लिया जाता है, जब केवल उनके बीज के पत्ते ही विकसित हुए होते हैं। तीन साल बाद दिसंबर 2020 में 48 साल के अजय ने नौकरी से इस्तीफा दे दिया। उन्‍होंने कोच्चि में अपने घर वापस आकर माइक्रोग्रीन्स उगाना शुरू ...

Success Story: कहानी स्कूल टीचर की जो UPSC क्रैक कर बन गई IPS अफसर

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  आईपीएस प्रीति चंद्रा राजस्थान के सीकर की रहने वाली हैं और वर्तमान में बीकानेर की एसपी हैं. वे बीकानेर की पहली महिला एसपी हैं. वह एक असाधारण महिला और एक प्रतिष्ठित आईपीएस अधिकारी हैं. उन्हें "लेडी सिंघम" नाम दिया गया है. प्रीति चंद्रा का जन्म 1979 में हुआ था. वह कुंदन गांव की रहने वाली हैं. आईपीएस चंद्रा यूपीएससी परीक्षा पास करने से पहले एक स्कूल टीचर थीं और उन्होंने पहले ही प्रयास में सबसे कठिन भर्ती परीक्षा पास कर ली. उनकी कहानी अटूट संकल्प की शक्ति और सफलता की राह पर चुनौतियों से पार पाने की क्षमता के प्रमाण के रूप में काम करती है. प्रीति चंद्रा की यात्रा समर्पण और दृढ़ता की है. उनकी पढ़ाई एक सरकारी स्कूल में शुरू हुई और महारानी कॉलेज, जयपुर से पोस्ट ग्रेजुएशन तक जारी रही. कोचिंग के अभाव के बावजूद, उन्होंने जयपुर में यूपीएससी की तैयारी की और 2008 की यूपीएससी परीक्षा में 255 की प्रभावशाली रैंक हासिल की. प्रीति चंद्रा ने प्रशासनिक सेवा में शामिल होने के लिए कड़ी मेहनत की और 2008 में बिना किसी कोचिंग के पहले ही अटेंप्ट में यूपीएससी परीक्षा पास कर ली और आईपीएस अधिकारी बन गईं....

Success Story: आइसक्रीम ने बना दिया करोड़पति, अब चलाते हैं खुद की कंपनी

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  सफलता कब कदम चूम ले, कुछ कहा नहीं जा सकता। जरूरत होती है तो सधे लक्ष्य और कड़ी मेहनत की। ऐसा ही कुछ किया झारखंड के 37 वर्षीय गगन आनंद ने। वह 17 साल की उम्र में जेब में मात्र 1,200 रुपये लेकर दिल्ली अपने भाई के पास आ आए थे। रकम बेशक छोटी थी, लेकिन आंखों में सपने बड़े थे। दिल्ली आने के बाद उन्होंने पिज्जा हट में मात्र 1,500 रुपये महीने की नौकरी शुरू की। आज उनका वक्त पूरी तरह बदल चुका है। वह एक कंपनी के मालिक हैं जो स्कूजो आइस-ओ-मैजिक (Scuzo Ice-O-Magic) नाम से आइसक्रीम बेचती है। इसके कैफे में कई तरह की आइसक्रीम मिलती है। आज इनका सालाना कारोबार करीब 8 करोड़ रुपये का है। हीरो बनने आए थे दिल्ली गगन झारखंड (तब बिहार) के रहने वाले हैं। मध्यम वर्गीय परिवार में पले-बढ़े गगन चार भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं। वह एक्टर बनना चाहते थे। 10वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद उनके पिता रिटायर हो गए थे। पेंशन से पूरे परिवार का खर्च बमुश्किल ही चल पा रहा था। परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए वह एक्टर बनने का सपना लेकर दिल्ली आ गए।  नौकरी दिल्ली आने के बाद उन्हें बहुत जल्दी पता चल गया कि इ...

Success Story: गांव से शुरू किया ये काम, अब 5 करोड़ का बिजनेस, शार्क टैंक के जज भी चौंक गए

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  हिमाचल प्रदेश में ऊना जिले के बंगाणा गांव के 23 वर्षीय अंकुश बरजाता ने कम उम्र में ही बिजनेस में बड़ी कामयाबी हासिल कर ली है। उन्होंने लाखों की नौकरी छोड़कर अपनी ऑनलाइन मार्केटिंग कंपनी 'दीवा' शुरू की। 'दीवा' अब करोड़ों का सालाना कारोबार करती है। अंकुश हाल में 'शार्क टैंक इंडिया' शो में भी दिखासई दिए। उनके अनोखे बिजनेस मॉडल ने शार्क टैंक के जजों अमन गुप्ता, राधिका गुप्ता और रितेश अग्रवाल को बहुत प्रभावित किया। तीन जजों से उन्‍होंने 2 करोड़ रुपये की डील झटकी। आइए, यहां अंकुश बरजाता की सफलता के सफर के बारे में जानते हैं। बचपन में देखी गरीबी: हिमाचल प्रदेश के एक छोटे से गांव बंगाणा से काम करते हुए अंकुश बरजाता ने 5 करोड़ रुपये की कंपनी खड़ी कर सभी को चौंका दिया है। अंकुश का सफर आसान नहीं था। उन्‍होंने बचपन में कई मुश्किलें देखीं। उनके दादा कपड़े बेचकर परिवार का गुजारा करते थे। मां भी घर चलाने में हाथ बंटाती थीं। अंकुश के दादा गांवों में सलवार कमीज बेचने वाले फेरीवाले थे। घर पर एक छोटी सी चाय की दुकान थी। सिर्फ एक ही बार भोजन करने को मिलता था। स्थिति इतनी दयनीय थी...

SabjiKothi Success Story: IIT से पढ़ाई, किसानों के लिए बनाय चलता-फिरता कोल्ड स्टोरेज... जानिए Nikki Kumar Jha की कहानी

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  SabjiKothi Startup: बिहार के भागलपुर के रहने वाले 27 साल के निक्की कुमार झा ने 'सब्जी कोठी' नाम से एक ऐसा स्टार्टअप शुरू किया, जिससे किसानों की एक बड़ी समस्या का समाधान में मदद मिली. इसकी मदद से किसानों की फसल खराब होने से बचाया जा सकता है. यह एक चलता-फिरता कोल्ड स्टोरेज है. यह सब्जियों और फलों की ताजगी को 5-7 दिन तक बनाए रखने में मदद करता है. भारत के किसान दिन-रात खेतों में मेहनत करते हैं. लेकिन उनकी जिंदगी में असली लड़ाई तब शुरू होती है, जब फसल तैयार होती है. सही दाम मिलना तो दूर, कई बार उनकी मेहनत की फसल मंडी तक पहुंचने से पहले ही खराब हो जाती है. किसानों के लिए यह समस्या काफी बड़ी है. बिहार के भागलपुर के रहने वााले निक्की कुमार झा ने इस समस्या का समाधान निकाला और किसानों की जिंदगी काफी आसान बनी दी. 27 साल के निक्की झा ने सब्जी कोठी नाम से स्टार्टअप की शुरुआत की. यह एक चलता-फिरता कोल्ड स्टोरेज है. चलिए आपको 50 करोड़ की कंपनी खड़ी करने वाले निक्की झा की कहानी बताते हैं. क्या है सब्जी कोठी- सब्जी कोठी एक पोर्टेबल स्टोरेज यूनिट है, जिसे सब्जियों और फलों को ताजा रखने के लिए डि...

Success Story: बिट्टू कुमार हैं जिन्होंने ठेला पर केक बेचकर फैक्ट्री के मालिक बने.

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  छोटे  स्टार्टअप और व्यापार  से बड़ी उपलब्धि प्राप्त की जा सकती है. इसकी एक मिसाल गया के अनुग्रह नारायण कालेज के पास केक का व्यवसाय करने वाले बिट्टू कुमार हैं. मजदूरी करने वाले बिट्टू कुमार ने ठेले से अब कारखाने तक की यात्रा कर ली. बिट्टू 4 से 5 लाख रुपये की कमाई कर रहे हैं. एक कारखाना और एक केक की दुकान का संचालन कर रहे हैं. आज सफल युवा व्यापारी के रूप में पहचान बना रहे हैं. मजदूरी कर फैक्ट्री के मालिक बनेः  बिट्टू कुमार ने बताया कि पहले वे मजदूरी करते थे. घर की स्थिति ठीक नहीं थी और मां की तबीयत खराब रहती थी. इस कारण उन्होंने ज्यादा पढ़ाई नहीं की. लेकिन घर को संभालने के लिए काम करने लगे. इसी केक की एक दुकान में वे काम करते थे. बाद में उन्होंने ठेले पर केक बेचना शुरू किया. केक दुकान मालिक किसी कारण अपनी दुकान किराए दे रहे थे. इसकी जानकारी मिलने के बाद बिट्टू कुमार लोन लेकर दुकान ले लिए. पहले मैं इस दुकान में काम करता था. फिर ठेला पर केक बेचने लगा. बाद में पता चला कि दुकान मालिक दुकान को किराये पर दे रहा है. इसके बाद मैने लोन लेकर दुकान किराए पर ले लिया. कुछ दिनों क...

इंदर जयसिंघानी: मुंबई की लोहार चॉल से निकलकर अरबपति बने हैं

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इंदर जयसिंघानी पॉलीकैब इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। उन्‍होंने मुंबई की झोपड़पट्टी से अरबपति बनने तक का सफर तय किया है। उनकी कहानी लाखों लोगों को प्रेरणा देती है। सिर्फ 15 साल की उम्र में स्कूल छोड़ने पर मजबूर होने वाले इंदर जयसिंघानी अब 8.6 अरब डॉलर की संपत्ति के मालिक हैं। उन्होंने पॉलीकैब को देश की सबसे बड़ी वायर और केबल मैन्‍यूफैक्‍चरिंग कंपनी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आइए, यहां इंदर जयसिंघानी की सफलता के सफर के बारे में जानते हैं। मुंबई की झोपड़पट्टी में जन्‍म: इंदर जयसिंघानी की कहानी दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत का शानदार उदाहरण है। मुंबई की झोपड़पट्टी से शुरुआत करते हुए उन्होंने खुद को भारत के सबसे अमीर व्यक्तियों में से एक के रूप में स्थापित किया है। उनका जीवन एक प्रेरणा है कि कैसे कठिनाइयों का सामना करते हुए सफलता हासिल की जा सकती है। जयसिंघानी का जन्म मुंबई के लोहार चॉल में हुआ था। पारिवारिक व्यवसाय में मदद करने के लिए उन्होंने 15 साल की उम्र में स्कूल छोड़ दिया था। पिता के आकस्मिक निधन के बाद उन्हें कम उम्र में ही जिम्मेदारियों का भार उठाना पड...

सानिया जेहरा: बाप-दादा का बिजनेस संभाल तगड़ी कमाई कर रही 20 साल की लड़की

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  अक्सर जिस घाटी से कभी पत्थरबाजी और गोलियां चलने की खबरें आती थी, अब उस कश्मीर घाटी की फिजा बदल चुकी है। घर की चारदीवारी से निकलकर, कश्मीर में महिलाएं अब बिजनेस में अपना परचम लहरा रही हैं। पहले कश्मीर में महिलाओं का काम करना या बिजनेस करना आम बात नहीं थी। लेकिन अब, समय के साथ लोगों की सोच बदल रही है। सानिया जेहरा जैसी कई कहानियां इस बदलाव की मिसाल हैं। महज 20 साल की सानिया कश्मीर की दूसरी लड़कियों के लिए भी प्रेरणा बन रही हैं। कश्मीरी महिलाएं अब पुरानी रूढ़ियों को तोड़कर बिजनेस की दुनिया में नए मुकाम हासिल कर रही हैं। इन्हीं में से एक हैं सानिया जेहरा, जो मधुमक्खी पालन के क्षेत्र में एक मिसाल बन गई हैं। कश्मीर के बलहामा की रहने वाली सानिया न सिर्फ अपने परिवार के पुश्तैनी व्यवसाय की रीढ़ बन चुकी हैं, बल्कि अपने पूरे समुदाय को भी एक नई दिशा दे रही हैं। सानिया बताती हैं कि मधुमक्खी पालन उनका पुश्तैनी बिजनेस रहा है। पहले उनके दादा ये बिजनेस संभालते थे और इसके बाद उनके पिता ने इसे आगे बढ़ाया। तीसरी पीढ़ी के तौर पर अब सानिया इसे संभाल रही हैं। हालांकि, शुरुआत में ऐसा नहीं था। उन्होंने क...

Bachpan Play School : पोलियो के चलते चलना था मुश्किल, लेकिन इस आइडिया ने मचाया धमाल, आज 100 करोड़ का साम्राज्य

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  अजय गुप्ता 'बचपन प्ले स्कूल' के संस्थापक हैं। यह 1200 से ज्‍यादा स्कूलों की फ्रेंचाइजी चेन है। अजय ने अपनी शारीरिक चुनौतियों को पार करते हुए 100 करोड़ रुपये की कंपनी बनाई है। नौ महीने की उम्र में पोलियो से पीड़ित होने के बाद उन्हें बचपन से ही कई बाधाओं का सामना करना पड़ा। लेकिन, सफल होने के दृढ़ संकल्प ने उन्हें एक कामयाब उद्यमी बनने के लिए प्रेरित किया। आइए, यहां अजय गुप्‍ता की सफलता के सफर के बारे में जानते हैं। दिल्‍ली से रखते हैं ताल्‍लुक दिल्ली में एक संयुक्त परिवार में पले-बढ़े अजय गुप्‍ता कम उम्र में ही पोलियो का शिकार हो गए थे। इससे उनके दोनों पैर स्थायी रूप से प्रभावित हुए। उनके दादा की मिठाई की दुकान उनकी दुनिया का केंद्र बन गई। इस दुकान में वह अपने परिवार के प्यार और देखभाल से घिरे हुए थे। हालांकि, जब एक शिक्षक ने उनके दादा से अजय को स्कूल भेजने का आग्रह किया, तो उनके जीवन ने महत्वपूर्ण मोड़ ले लिया। शुरुआत में अजय को स्कूल ले जाना एक चुनौती थी। उनके परिवार ने उनकी शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए अथक प्रयास किया। पहले उन्हें गोद में ले गए। फिर पीठ पर सहारा लेकर और अंत...

SUCCESS STORY: सिंपल बिजनेस शुरू करके 2 बहने कर रही हर साल 8 करोड़ रूपये की कमाई

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आज हम बात करने वाले हैं बेंगलुरु की पॉपुलर यशोदा और रिया कुरीतुरु की कहानी के बारे में। इन्होंने हूवु नाम से एक स्टार्टअप शुरू किया। आईए जानते हैं इन्होंने कैसे बिजनेस की शुरुआत की और कैसे इसे 8 करोड रुपए के टर्नओवर तक पहुँचाया। हूवु एक अनोखा बिजनेस मॉडल है जिसका सही मतलब होता है फूल। यहां पर बेंगलुरु के रहने वाली यशोदा और रिया ने पारंपरिक फूलों के बिजनेस को एक नए तरीके से शुरू किया। इसके बाद फूलों की बिक्री का तरीका ही बदल गया है। प्रत्येक घर पर रोजाना फूलों के ताजा डिलीवरी शुरू हो गई। त्यौहार हो या रोजाना पूजा का काम यह कंपनी अब ताजा फूल प्रत्येक ग्राहक को उनकी जरूरत के अनुसार उपलब्ध करवाती है। कैसे शुरू हूवु बिजनेस की शुरुआत यशोदा और रिया ने अपने बिजनेस की शुरुआत फूलों की बिक्री से की थी। यह एक पारंपरिक बिजनेस था जो पिछले काफी समय से अनौपचारिक तरीके से चलता हुआ आ रहा है। इसी में कुछ नया करने के लिए इन्होंने बिजनेस करने की सोची इनको पता था की फुल जल्दी मुरझा जाते हैं। अगर इसको लेकर और सप्लाई चैन को लेकर दिक्कतें खत्म कर दी जाए तो एक नया बिजनेस शुरू किया जा सकता है। इसी आइडिया को ध्या...