Success Story: अपने पिता के कारखाने में काम शुरू किया फिर ऐसे बने हुनरमंद... खड़ा कर दिया अरबों का साम्राज्य
राकेश चोपदार की कहानी प्रेरणा देने वाली है। पढ़ाई में कमजोर समझे जाने वाले राकेश आज बड़े उद्योगपति हैं। उन्होंने ग्लोबल मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में अपनी पहचान बनाई है। उनकी कहानी बताती है कि मुश्किलें भी सफलता की सीढ़ी बन सकती हैं। राकेश के शुरुआती दिन आसान नहीं थे। दसवीं कक्षा में कम नंबर आने पर उन्हें परिवार और दोस्तों की आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। कई लोगों ने उन्हें नाकामयाब करार दिया। लेकिन, राकेश ने हार नहीं मानी। वह अपने पिता के कारखाने 'एटलस फास्टनर्स' में काम करने लगे। वहां उन्होंने इंजीनियरिंग और मैन्यूफैक्चरिंग के गुर सीखे। यही अनुभव उनके भविष्य की नींव बना। आइए, यहां राकेश चोपदार की सफलता के सफर के बारे में जानते हैं।
राकेश चोपदार पढ़ाई में अच्छे नहीं थे। उन्हें फिसड्डी होने के बहुत ताने मिलते थे। स्कूल छोड़ने के बाद उन्हें लगा उनका जीवन दिशाहीन है। परिवार वालों के सवाल भी उन्हें परेशान करने लगे। फिर राकेश ने पिता की नट-बोल्ट बनाने की फैक्ट्री में काम शुरू किया। बारह साल पारिवारिक व्यवसाय में काम करने के बाद राकेश ने 2008 में अपनी कंपनी आजाद इंजीनियरिंग शुरू की। एक छोटे से शेड में सेकंड-हैंड CNC मशीन से उन्होंने इसकी शुरुआत की। उन्हें थर्मल पावर टर्बाइन्स के लिए एयरफॉइल बनाने का बड़ा ऑर्डर मिला। यहीं से उनकी कंपनी का वैश्विक स्तर पर उदय हुआ।
अब जाना-माना नाम
आज आजाद इंजीनियरिंग मैन्यूफैक्चरिंग की दुनिया में जाना-माना नाम है। यह कंपनी हाई-प्रिसिशन रोटेटिंग पार्ट्स बनाती है। इन पार्ट्स का इस्तेमाल बिजली उत्पादन, सैन्य विमान, तेल और गैस क्षेत्रों में होता है। कंपनी ने रोल्स-रॉयस, बोइंग, GE और प्रैट एंड व्हिटनी जैसी बड़ी कंपनियों के साथ पार्टनरशिप की है। 2008 में 2 करोड़ रुपये के रेवेन्यू से आजाद इंजीनियरिंग ने 2023-24 में 350 करोड़ रुपये का प्रभावशाली रेवेन्यू हासिल किया। पब्लिक लिस्टिंग के बाद कंपनी का मार्केट वैल्यूएशन 1 अरब डॉलर से अधिक हो गया।
Comments
Post a Comment